40 करोड़ के घोटालेबाजों के आबकारी अधिकारियों से थे गहरे संबंध

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इंदौर .ट्रेजरी के चालान में हेरफेर कर शासन को 40 करोड़ से ज्यादा राजस्व का नुकसान पहुंचाने वाले शराब ठेकेदारों ने कई राज उगले हैं। आरोपियों ने कबूला कि घोटाले के मुख्य आरोपी राजू दशवंत और एटीएम ग्रुप के संचालक अंश त्रिवेदी के आबकारी अफसरों से गहरे संबंध रहे। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपी न सिर्फ अफसरों से सांठगांठ कर घोटाला करते थे, बल्कि उनके साथ आबकारी विभाग की बैठकों में भी मौजूद रहते थे।
एएसपी क्राइम ब्रांच अमरेंद्रसिंह चौहान ने बताया शराब ठेकेदार योगेंद्र पिता हुकुमचंद जायसवाल निवासी डब्ल्यूए स्कीम-94 विजय नगर और अविनाश पिता डोंगरसिंह मंडलोई निवासी विद्या नगर को बुधवार को गिरफ्तार किया था। इनका पांच दिन का रिमांड मिला है। दोनों ने यह भी बताया कि अफसरों के कहने पर दशवंत ने शहर की घाटे में जा रही शराब दुकानों को भी मात्र 6 महीनों में फर्जीवाड़ा कर प्रॉफिट में ला दिया था। इसके पीछे आबकारी के सभी प्रमुख अफसरों की भूमिका थी।
शराब ठेकेदार बोले- असली गुनहगार आबकारी अफसर
– शराब ठेकेदारों ने गुरुवार को प्रेस काॅन्फ्रेंस बुलाकर घोटाले में मुख्य आरोपी दशवंत, त्रिवेदी और आबकारी अफसरों को दोषी बताया। ठेकेदार वीरेंद्रसिंह ठाकुर, शिवपाल सिंह, मुकेश जायसवाल और सतेंद्रसिंह तोमर ने आरोप लगाए कि निलंबित आबकारी आयुक्त घोटाले के मास्टर माइंड हैं।
– दशवंत और त्रिवेदी को इन्हीं का संरक्षण था। दशवंत के एक साल की काल डिटेल पुलिस निकलवाए तो इसका खुलासा भी हो जाएगा। वहीं जो चालान जमा किए गए हैं उनकी राइटिंग मिलाए तो दशवंत की ही निकलेगी। आबकारी अफसरों के निर्देश पर वही उनकी दुकान संचालित कर रहा था।
– 1 लाख से ऊपर के हर चालान पर नियमानुसार आबकारी अधिकारी के हस्ताक्षर होने चाहिए, लेकिन दशवंत के एक भी चालान पर किसी अफसर के हस्ताक्षर नहीं है। 46.50 लाख कहां से जुटाए और किसे देने वाले थे. आरोपियों से क्राइम ब्रांच ये पता लगा रही है कि 46 लाख 50 हजार कहां से लाए थे और ये राशि किसे देने वाले थे। अभी तक की पूछताछ में आरोपी योगेंद्र और अविनाश ने ये बताया है वे फरार रहने के दौरान कुछ होटल संचालकों और दोस्तों के निर्देशन में रुके थे। उनका भी क्राइम ब्रांच पता लगा रही है।

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