इंदौर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर “ मुस्कुरा – ए – ज़िन्दगी ” कार्यक्रम का आयोजन क्रिएट स्टोरीज द्वारा किया गया | आयोजक दीपक शर्मा ने बताया की विश्व स्वास्थ्य संगठन की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र में भारत की आत्महत्या दर सबसे अधिक है । इस खास मौके पर न्यूरो साइकेट्रिस्ट डॉ पवन राठी ने सभी से सुसाइड प्रिवेंशन और डिप्रेशन के ऊपर चर्चा की |

न्यूरो साइकेट्रिस्ट डॉ पवन राठी ने कहा की काफी बार हमे ज़िन्दगी जीना बहुत मुश्किल लगती है और कई बार ऐसा लगता है की हम एक अँधेरे कोने में फँस गएँ है जहाँ कोई भी रास्ता नज़र नहीं आता बहार निकलने का | जब हम ऐसा महसूस करते ही रहते है और ज़िन्दगी के रंग नहीं देख पाते तब हम उस अँधेरी राह पर हार मानने लगते है और एक कमज़ोर पल में काफी लोग खुद को नुकसान पहुंचा देते है  | उस एक पल वाले गलत कदम को रोकने के लिए हमे पहले ही उस राह पर रुककर पलटना होगा | इस राह पर चलने वालों को रोकना उनकी मुश्किल समझना फिर भी आसान है |

आजकल उन लोगों को बचाना ज्यदा मुश्किल है जो “ पैसिव सुसाइड ” कर रहे | रेश ड्राइविंग एक तरीका है जिससे काफी लोग खुद को खत्म करने की कोशिश करते है | बहुत स्मोक करना , पी कर गाडी चलाना और जानकार भी खुद का ध्यान न रखना भी काफी बार ये इंडीकेट करता है की हम शायाद उस अँधेरी राह पर है , जो हमारे आसपास वाले नज़रंदाज़ करते है |

जब किसी व्यक्ति की भावनाएँ, विचार अथवा व्यवहार दूसरे लोगों के लिए समस्या बन जाए तो यह उस व्यक्ति के मानसिक बीमारी से ग्रस्त होने के लक्ष्ण हो सकते हैं लेकिन समुचित जानकारी के अभाव में लोग इस ओर ध्यान नहीं देते जिससे समस्या गंभीर रूप धारण कर लेती है। मानसिक बीमारी होने का कारण दिमाग में ‘केमिकल इंबैलेंस’ होने की बात कहते हुए मनोचिकित्सक डॉक्टर पवन राठी ने कहा, जब तक समस्या बड़ी न हो तब तक लोगों का ध्यान मानसिक बीमारियों की ओर नहीं जाता । इसे संबंधित व्यक्ति की आदत समझकर लोग नजरअंदाज कर देते है जबकि कुछ लोग मानसिक बीमारी को पागलपन समझ बैठते हैं ।

कृपया ध्यान दीजिए –

यदि आप अपने परिवार या दोस्तों में किसी के साथ ऐसा कुछ देख रहे है या नेचर में ऐसा कुछ बदलाव देखकर रहे है तो सतर्क हो जाइये उनसे बात करिए , रास्ता निकालिए क्यूंकि हो सकता है ऐसे व्यक्ति सुसाईडल स्टेज पर हो-

  • बहुत ज्यदा उदास होना
  • सबको गुडबाय बोलना और माफ़ी मांगना
  • अपनी चीजों को बाटना , विल लिखना
  • ड्रग्स या अल्कोहल का सेवन बहुत ज्यदा करना
  • सोने और खाने के रूटीन में बहुत ज्यदा बदलाव
  • लोगों से दूर होना , किसी से न मिलना या बात करना

हमे कैसे सुसाईडल व्यक्ति की मदद करने का प्रयास कर सकते है-

  • उन्हें सुनिए
  • अपना सपोर्ट दीजिये और उनकी किसी बात को मत नकारिये
  • शांति और धैर्य से उनकी हर एक बात सुनिए
  • कोशिश करके उन्हें कोई “होप” दिखाइए
  • जब भी उन्हें ज़रुरत हो , न जाने वो क्या कर सकते है उन्हें अकेला ना छोडिये
  • डॉक्टर से एडवाइस लीजिये

जब आपको लगे की अब कोई रास्ता नहीं है , ज़िन्दगी का कोई मतलब नही है और ज़िन्दगी में सब समाप्त हो चुका है , तब आपको खुदको एक पल रोकना आना चाहिए और आगे बढ़कर आशा की किरण ( होप ) ढूंडना चाहिए , यदि इंसान में होप हो तो वो कई साल बिना गम के ज़िन्दगी को मुस्कुराते हुए जी और जीत सकता है |

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