UPA ने की थी तीन सर्जिकल स्ट्राइक, मोदी ने सैन्य फैसले को बनाया राजनीतिक संपत्ति: राहुल

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उदयपुर. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक जैसे ‘सैन्य फैसले’ को भी ‘राजनीतिक संपत्ति’ बना दिया है, जबकि यही काम पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार ने तीन बार किया था। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने सेना के अधिकार क्षेत्र में घुसते हुए उनकी सर्जिकल स्ट्राइक को राजनीतिक संपत्ति में बदल दिया जबकि वास्तव में यह एक सैन्य फैसला था।’
उदयपुर के एक कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनावों में हार सामने दिखी तो मोदी ने एक सैन्य संपत्ति को राजनीतिक संपत्ति में बदल दिया। उन्होंने कहा, ‘क्या आपको पता है कि मनमोहन सरकार ने भी तीन बार सर्जिकल स्ट्राइक की थी। भाषण में बीजेपी पर हमलावर होकर राहुल ने कहा, ‘हम सैन्य मामलों में सेना की सुनते हैं, उनकी मानते है जबकि राजनीतिक मामलों में उसे प्रवेश की अनुमति नहीं देते। लेकिन प्रधानमंत्री ने सेना के अधिकार क्षेत्र (डोमेन) में घुसते हुए उनकी सर्जिकल स्ट्राइक को राजनीतिक संपत्ति (एसेट) में बदल दिया, जबकि वास्तव में यह एक सैन्य फैसला था।’ गांधी ने कहा कि पीएम मोदी को लगता है कि दुनिया का सारा ज्ञान उनके ही दिमाग से आता है और बाकी दुनिया को कुछ नहीं मालूम है।
नोटबंदी और जीएसटी को लेकर जनता भ्रमित
कांग्रेस अध्यक्ष ने यहां बैंकों के बकाया कर्ज को लेकर भी मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यूपीए ने जब मोदी जी को सरकार सौंपी तब एनपीए दो लाख करोड़ रुपये था जो चार साल में बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये हो गया है। राहुल ने नोटबंदी को ऐसा घोटाला बताया जिसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों और दुकानों की रीढ़ तोड़ना था। राहुल ने कहा नोटबंदी और जीएसटी को लेकर हिंदुस्तान की जनता ‘भ्रमित’ है। उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी एक घोटाला था और इसका लक्ष्य सूक्ष्म व लघु कारोबार की, दुकानदारों की रीढ़ तोड़ना था।’
किसानों का कर्ज भी माफ करे सरकार: राहुल
गांधी ने कहा कि वे उद्योगपतियों के खिलाफ नहीं है लेकिन चाहते हैं कि अगर मोदी सरकार ने 15 लोगों के साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए माफ किए हैं तो हिंदुस्तान के करोड़ों किसानों का भी वह कर्ज माफ करे, उन्हें न्याय दे।’आज देश बेरोजगारी की समस्या से परेशान है और प्रधानमंत्री रोजगार का निर्माण करने में पूरी तरह से विफल हुए हैं। इस समय देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगारी दूर करना है। आज देश के सरकारी संस्थान सबसे बेहतर है लेकिन उन्हें 21वीं सदी की जरूरतों के हिसाब से ढालने की जरूरत है।

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