इंदौर की बस्ती से निकल रहे चमकते सितारे

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इंदौर। शहर से बेशकीमती सितारें निकल रहे हैं, जिनकी चमक अब पूरे देश में फेल रही है। शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में इंदौर घराने का नाम आज भी बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है, लेकिन पाश्र्व गायन के मामले में इंदौर से कई प्रतिभाएं अपनी आवाज का जादू बिखेर रही है। एक समय था जब इंदौर के राजबाड़ा पर देश के जवानों के लिए सुप्रसिद्ध पाश्र्वगायिका पलक मुछाल ने जरा याद करो कुर्बानी गाया था। उसके बाद से ही इस गायिका ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज पूरे देश में उनके गीत गाए जाते है। इसी तर्ज पर अब इंदौर के गरीब बस्तियों में रहने वाले युवाओं की आवाज को भी खासा पसंद किया जा रहा है।

बचपन से सिंगर बनने का ख्वाब लेकर बड़े हो रहे हितेश चौहान को भले ही अब तक कोई बड़ा मंच, टीवी या किसी फिल्म में काम न मिला हो, लेकिन उसकी आवाज के जादू से वह इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है। एक छोटी बस्ती में अपने दादा-दादी के पास रहकर हितेश पढ़ाई के साथ ही अब तक १५० से अधिक भजनों और फिल्मी गानों के कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुका है। शहर के उभरते इस कलाकार को लोग जहां गाते सुनते हैं, दाद देना शुरू कर देते हैं। बीकॉम की पढ़ाई पूरी करने के साथ इन दिनों वह शास्त्रीय संगीत महाविद्यालय से गायकी सीख रहा है और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रयासरत है।

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