सीएम साहब वनमंत्री से मांगे स्पष्टीकरण, पूर्व पीसीसीएफ ने लिखा पत्र

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प्रति,
श्री शिवराज सिंह चैहान,
माननीय मुख्यमंत्री,
मध्यप्रदेश
विषयः- ग्वालियर वृत्त में हो रहे अंधाधुन्ध अवैद्य उत्खनन की जांच नहीं कराने के फलस्वरूप डाॅ. अनिमेष शुक्ला, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, म.प्र. के विरूद्ध अनुषासनात्मक कार्रवाई करने बावत्।

निवेदन है कि अधोहस्ताक्षरकर्ता द्वारा विगत 5 वर्ष से भी ज्यादा अवधि से ग्वालियर वृत्त में हो रहे अंधाधुन्ध अवैद्य उत्खनन की जांच कराने, श्री दिलीप कुमार तत्कालीन वनमण्डलाधिकारी ग्वालियर के विरूद्ध विभागीय जांच संस्थित करने एवं श्री ओ.पी. जाटव तत्कालीन वन परिक्षेत्राधिकारी, घाटीगांव उत्तर के विरूद्ध संस्थित विभागीय जांच में आवश्यक कार्रवाई करने बाबत्प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मध्यप्रदेश से बारम्बार अनुरोध किया जाकर समस्त पत्रों की प्रतिलिपियां अपर मुख्य सचिव, वन को प्रेषित की गई हैं ।
मेरे द्वारा उपरोक्त सम्बन्ध में एक विस्तृत प्रतिवेदन अर्द्ध शासकीय पत्र क्रमांक/57 दि. 12.10.15 से अपर मुख्य सचिव, वन को भेजा गया था जिसकी प्रतिलिपि प्रधान मुख्य वन संरक्षक, म.प्र. को दी गई है। बारम्बार अनुरोध करने के बावजूद अपर मुख्य सचिव, वन एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक, म.प्र. द्वारा इस सम्बंध में कोई भी कारगर कार्रवाई नहीं करने पर सेवानिवृत्ति से पूर्व पत्र दिनांक 28.01.17 के साथ प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मध्य प्रदेश को प्रेषित अर्द्ध शासकीय पत्र दिनांक 23.01.17 की छायाप्रति मय सहपत्रों के (कुल पृष्ठ-126) वन मंत्री, मध्यप्रदेश को प्रेषित की गई। मैंने अपने पत्र दिनांक 28.01.17 में वनमंत्री, मध्यप्रदेश से निवेदन किया था कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा इस प्रकरण में अपनाये जा रहे ढुल-मुल रवैये से ग्वालियर वृत्त में ही नहीं अपितु प्रदेश के सभी वृत्तों में अवैद्य उत्खनन को बढ़ावा मिल रहा है जो अवैद्य उत्खनन के प्रति आपके द्वारा अपनाई जा रही नीति के बिल्कुल विपरीत है।
मैंने यह भी लेख किया था कि ग्वालियर वृत्त में लगातार हो रहे अवैद्य उत्खनन से एक तरफ जहां ग्वालियर वन मंडल में पत्थर के अवैद्य उत्खनन के कारण घाटीगांव अभ्यारण्य से सोन चिरैया नामक दुर्लभ पक्षी गायब हो गये हैं वहीं दूसरी ओर चम्बल अभ्यारण्य में रेत के अवैद्य उत्खनन से घड़ियाल एवं अन्य जलीय जीव-जन्तुओं का जीवन ही खतरे में पड़ गया है। ऐसीजानकारी प्राप्त हुई है कि विभाग द्वारा घाटीगांव अभ्यारण्य में लगातार हो रहे अंधाधुन्ध अवैध उत्खनन पर तो कोई रोक नहीं लगाई जा रही है, उल्टे अभ्यारण्य का क्षेत्रफल घटाने की कार्रवाई शासन स्तर पर प्रचलन में है, जो निश्चित ही चिन्ता का विषय है।
मैंने मंत्री जी को लिखे पत्र में यह भी निवेदन किया था कि विगत माह में श्री जी.एल. जौनवार जो पूर्व में घाटीगांव में ही अधीक्षक के पद पर पदस्थ था, को चम्बल अभ्यारण्य में कुछ माह पदस्थिति उपरांत ही उप वनमंडला अधिकारी घाटीगांव में पुनः पदस्थ कर दिया गया है। श्री दौरजी जाटव, उप वन क्षेत्रपाल जो पूर्व में अनेकों वर्ष ग्वालियर वन मंडल में पदस्थ रहा है, वन क्षेत्रपाल के पद पर पदोन्नति उपरांत ग्वालियर से बाहर पदस्थ किया गया था, को कुछ माह में ही पुनः ग्वालियर वन मंडल में पदस्थ कर दिया गया है। इसी प्रकार श्री जी.के. चंद, उप वनमंडला अधिकारी को भी वनक्षेत्रपाल से सहायक वनसंरक्षक के पद पर पदोन्नति उपरांत ग्वालियर से बाहर पदस्थ किया गया था लेकिन इनको कुछ माह में ही पुनः ग्वालियर वनमंडल में पदस्थ कर दिया गया। श्री चंद लगभग 25 वर्षों से ग्वालियर वन मंडल में पदस्थ रह कर अवैध उत्खनन करवा रहे हैं। ऐसे कई और भी अधिकारी/कर्मचारी हैं जो वर्षों से ग्वालियर वन मंडल में ही पदस्थ रह कर अवैध उत्खनन के खेल मंे लिप्त हैं। इस तरह की पदस्थितियाँ कर विभाग ग्वालियर वन मंडल में अवैध उत्खनन को रोकने के बजाय बढ़ावा दे रहा है।

गौरतलब है कि अधिकारियों के एक ही वनमंडल में वर्षों तक पदस्थ रहने से ग्वालियर वनमंडल में अत्यंत विषम परिस्थितियाँ पैदा हो गई हैं। वैसे तो लगभग हर दूसरे दिन ग्वालियर एवं मुरैना वनमंडलों में हो रहे अवैध उत्खनन से संबंधित समाचार प्रकाषित होेते रहते हैं लेकिन मैंने अपने पत्र दिनांक 01.08.17 से वनमंत्री जी का ध्यान दैनिक भास्कर, ग्वालियर के दिनांक 28.07.2017 में प्रकाषित समाचार की ओर आकर्षित किया था जिसमें स्टोन पार्क ग्वालियर के व्यापारियों द्वारा वन कर्मचारियों को बंधक बनाने की खबर छपी थी। इस समाचार में लाखों रूपये के लेन-देन के आरोप भी वन अधिकारियों पर लगाये गये हैं। मैंने अपने पत्र में यह भी लेख किया था कि मुझे प्राप्त जानकारी के अनुसार इस प्रकरण में श्री जी.के.चन्द, उपवनमंडला अधिकारी ग्वालियर की भूमिका सवालों के घेरे में है। ऐसे गंभीर प्रकरण की तत्काल जाँच कराने की मांग मंत्री जी से की गई थी।

मैंने अपने पत्र दिनांक 28.01.17 में मंत्री जी से यह भी निवेदन किया था कि मैं विगत 5 वर्षों से भी ज्यादा अवधि से पत्र में उल्लेखित तीनों प्रकरणों में जांच कराने हेतु बारम्बार अनुरोध कर रहा हूं लेकिन विभागाध्यक्ष द्वारा इन प्रकरणों में कोई कारगर कार्रवाई नहीं की गई है।चूंकि मैं मध्यप्रदेश के वन विभाग में 30 वर्ष की सेवा पूर्ण कर दिनांक 31.01.2017 को सेवानिवृत्त होने जा रहा था अतः मैंने विभागाध्यक्ष के रवैये से पूर्णतः निराश होकर इस प्रकरण को मंत्री वन को इस आषा से प्रेषित किया था कि वे मेरे अनुरोध पर अवष्य आवष्यक कार्रवाई करेंगे और प्रकरण की विधिवत जांच करने हेतु विभागाध्यक्ष को आवश्यक निर्देशदेगें ताकि समस्त दोषी दण्डित हो सकें।

मैंने अपने पत्र दिनांक 01.08.17 में मंत्री जी को यह लेख किया था कि दिनांक 28.01.17 से पत्र लिखने के 6 माह व्यतीत होने के बाबजूद भी उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है जिससे स्पष्ट होता है कि उनकी भी अवैद्य उत्खनन की रोकथाम में कोई रूचि नहीं है और वे भी ग्वालियर वृत्त में पदस्थ रहे अधिकारियों को बारम्बार ग्वालियर में ही पदस्थ कर अवैद्य उत्खनन कराने वाले अधिकारी/कर्मचारियों को संरक्षण दे रहे हैं। मैंने मंत्री जी को अंतिम बार लेख कर अनुरोध किया था कि उपरोक्त विषयांकित तीनों प्रकरणों की जाँच मुख्यालय से जाँच अधिकारी नियुक्त कर अधिकतम 1 माह (दिनांक 31.08.2017 तक) में पूर्ण करावें अन्यथा यह मानते हुये कि आप स्वयं ग्वालियर वृत्त में अंधाधुंध अवैद्य उत्खनन को बढा़वा दे रहे हैं, आपके विरूद्ध माननीय मुख्यमंत्री जी को लेख कर दिया जावेगा।

चूंकि माननीय मंत्री जी द्वारा मेरे पत्र दिनांक 01.08.17 में किये गये अनुरोध पर ग्वालियर वृत्त में हो रहे अन्धाधुंध अवैद्य उत्खनन की जांच कराने हेतु दिनांक 31.08.17 तक कोई कारगर पहल नहीं की गई है जिसके फलस्वरूप करोड़ो रूपये के अवैद्य उत्खनन में पूर्णतः लिप्त तत्कालीन वन मंडलाधिकारी, ग्वालियर श्री दिलीप कुमार शीघ्र ही अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद पर पदोन्नत होने वाले हैं। यहाँ यह भी गौरतलब है कि अगर ग्वालियर वन मंडल में हो रहे अवैद्य उत्खनन की जाँच समय पर की जाती तो श्री दिलीप कुमार जैसा भ्रष्ट अधिकारी वन संरक्षक के पद से मुख्य वन संरक्षक के पद पर ही पदोन्नत नहीं हो पाता और अब ऐसे दागी अधिकारी को अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक जैसे वरिष्ठ पर पदोन्नति नहीं हो पाती। विभाग द्वारा ऐसी गंभीर षिकायतों की भी त्वरित जाँच नहीं करना अपराधिक श्रेणी में आता है जिसके लिये विगत 5 वर्षों में जो भी अधिकारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक, म.प्र. के पद पर पदस्थ रहे हैं, वे समस्त दोषी हैं। वर्तमान प्रधान मुख्य वन संरक्षक डाॅ. अनिमेष शुक्ला द्वारा तो इस प्रकरण को पूर्णतः दफना ही दिया गया है जिसके फलस्वरूप इनके विरूद्ध अनुषासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिये। साथ ही ग्वालियर वृत्त में हो रहे अवैद्य उत्खनन की अविलम्ब जाँच कराने हेतु अनुरोध है।

शासन हित में वनमंत्री जी से भी उपरोक्त संबंध में स्पष्टीकरण लिया जाना श्रेयष्कर होगा। आषा है कि प्रदेष हित में आप अतिषीघ्र उचित कार्रवाई करेगें।

(आजाद सिंह डबास)
सेवानिवृत्त अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक

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