इंदौर। गांधी हॉल परिसर में विराजे गणपति दस दिन तक भक्तों को भक्ति, शक्ति और ऊर्जा का प्रसाद बांटने के बाद आज मिटटी के उन लड्डुओं में तब्दील हो गए जो अब वर्षों तक हरियाली फैलाएँगे। इंदौर के राजा के रूप में बैठे सबसे बड़े गणेश को अपनी ही जगह पर जलाभिषेक कर मिट्टी में बदल दिया गया. अब इसमें बीज की दस हजार गेंद (सीड बॉल) बनाई जाएंगी। इसी गेंद से निकले अंकुरण प्रकृति की खुराक बनेंगे। देश में पहली बार गणेश प्रतिमा को विसर्जित करने के बजाय सीड बॉल बनाई गई। 12 फीट ऊंची इस गणेश प्रतिमा को गणोशोत्सव के बाद यहीं स्नान कराया गया. सीड बॉल की इस जापानी पद्धति से प्रकृति को उपहार दिया जाएगा। यह गेंद मिट्टी खाद, बोरिक पाउडर, लाल मिर्च और बीज को मिलाकर बनाई जाएगी।

नर्मदा को ओढ़ाएंगे हरी चुनर
इस नवाचार के कल्पनाकार और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर आलोक दुबे का कहना है कि यह गेंद एक साल तक सुरक्षित रहती है और इसे धरती पर जहां भी फेंक दिया जाए, बारिश होते ही इससे पौधा उगना तय है। इसमें थोड़ी और मिट्टी मिलाकर दस हजार गेंदें तैयार की जाएंगी और नर्मदा के तटों को समर्पित कर उन्हें हरी चुनर ओढ़ाई जाएगी। इसमें मुख्य रूप से गुलमोहर और इमली के बीज होंगे।
नो वेस्ट पंडाल से स्वच्छता मिशन
गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने इसे सबसे बड़े अस्थायी पंडाल से नवाजा है, लेकिन यह अपने पीछे कोई कचरा छोड़कर जाने वाला नहीं है। इसमें 30 हजार बांस, 20 हजार मीटर रनिंग कपड़ा, दो ट्रक थर्मोकोल का इस्तेमाल हुआ है। आयोजकों के अनुसार बांस और थर्मोकोल जिनसे लिए गए हैं, उन्हें लौटा दिए जाएंगे और कपड़ा प्रसाद के रूप में गरीब पहनेंगे। यह प्रयोग इंदौर को स्वच्छ बनाने के लिए किया गया है, जिससे मां अहिल्या की नगरी को इसी तरह स्वच्छता का प्रथम पुरस्कार हासिल होता रहे।
एमवायएच में गरीब खाते हैं प्रसाद
‘इंदौर के राजा’ के इस पंडाल में भक्तों को प्रसाद वितरित नहीं किया जाता। आयोजकों का मानना है कि इस प्रसाद की जरूरत यहां आने श्रद्धालुओं को कम, गरीबों को ज्यादा होती है। इसीलिए बड़े अस्पताल यानी एमवायएच में गरीब मरीजों और उनके परिजन को भरपेट भोजन कराया जाता है। दस दिनों तक भूखों को ही भोग लगाकर उन्हें देवता माना जाता है।

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