जीएसटी के बाद अब आयकर विभाग ने बढाई व्यापारीयों की मुश्किलें

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इंदौर | हाल ही में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के द्वारा इनकम टैक्स लॉगिन का उपयोग करने से पूर्व कुछ अनिवार्य जानकारियां मांगी गयी है । इसके अंतर्गत इनकम टैक्स करदाता को अनिवार्य रूप से अपना इ मेल आई डी एवं मोबाइल नंबर, प्राथमिक इ मेल आई डी एवं प्राथमिक मोबाइल नंबर के रूप देना होगा । किसी भी कर सलाहकार अथवा चार्टर्ड अकाउंटेंट का इ मेल आई डी एक विकल्प के रूप में दर्शाते हुए दिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त करदाता को अपने बैंक अकाउंट एवं उस अकाउंट से जुड़े हुए मोबाइल नंबर की जानकारी भी देना अनिवार्य है । कोई भी इनकम टैक्स करदाता उपरोक्त लिखी गयी सभी जानकारियाँ देने के पश्चात इनकम टैक्स लॉगिन आई डी पर रिटर्न अथवा अन्य संबधित कार्य कर पायेगा। इनकम टैक्स विभाग ने इनकम टैक्स करदाताओं की लॉगिन आई डी की सुरक्षा हेतु यह कदम उठाये है। हालाँकि इस कदम से चार्टर्ड अकाउंटेंट , कर सलाहकारों एवं करदाताओं के लिए परेशानी बढ़ा दी है । जहाँ व्यापारी के पास जी एस टी में कार्यभार बढ़ने की बात सामने आयी है इनकम टैक्स की इस नीति में परिवर्तन से व्यापारी एवं कर सलाहकार असमंजस की स्थिति में है ।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा मांगी गयी जानकारियाँ निम्न प्रकार है –

Residential Status Mandatory/

Optional

Resident / Non Resident
Primary Mobile Number Mandatory Maximum use in 3 Profiles
Primary Number Belongs to Mandatory Self/Parent/Brother/Sister/Spouse/Relative/Friend
Secondary Mobile Number Optional
Secondary Number Belongs to Optional Self/Chartered Accountant/Tax Consultant/TRP/Relatives
Primary E Mail ID Mandatory Maximum use in 3 Profiles
Primary E Mail ID belongs to Mandatory Self/Parent/Brother/Sister/Spouse/Relative/Friend
Secondary Mail ID Optional
Secondary Mail ID belongs to Optional Self/Chartered Accountant/ Tax Consultant/TRP/Relatives
Address Details Mandatory
Bank Account Number Mandatory
Account Holder Name as per Bank Records Mandatory
Type of Account Mandatory
Mobile Number Linked with this Bank Account Mandatory
IFSC Code Mandatory
Bank Name Mandatory
Branch Name Optional

साभार : प्रणेश जैन “चार्टेड अकाउंटेंट”

1 COMMENT

  1. मेरे अनुसार आयकर के उपरोक्त कदम से व्यापारी की कोई मुश्किल नहीं । बल्कि कर सलाहकार की ही मुश्किल है ।

    अभी तक होता ये था कि कर सलाहकार या CA व्यापारी की पूरी प्रोफाइल अपने कब्जे में ही रखते थे । व्यापारी के पास कोई विकल्प भी नहीं होता था ।

    अब gst में भी return भरते वक्त व्यापारी के मोबाइल पर otp आता है । यानि व्यापारी की बिना सहमति अब कर सलाहकार कोई निर्णय या कदम नहीं उठा सकता ।

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