7 साल बाद देश के टॉप 5 इंस्टिट्यूट्स में से एक होगा आईआईएम इंदौर

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इंटरनेशनल फैकल्टी आएगी, भविष्य में इंडस्ट्री की डिमांड के मुताबिक डिज़ाइन किए जाएंगे कोर्स
इंदौर। यूं तो देश के 19 आईआईएम में आईआईएम इंदौर की रैंकिंग 6 से 10 के बीच है और और देश के टॉप मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट्स में यह संस्थान शामिल है, लेकिन आने वाले कुछ वर्षों में यह भारत के टाॅप 5 इंस्टिट्यूट्स के बीच अपनी जगह बनाएगा। इसके लिए संस्थान में इंटरनेशनल फैकल्टीज़ को अपाॅंइंट किया जाएगा। इन्फ्रास्ट्रक्चर और एकेडमिक करिकुलम में बड़े बदलाव किए जाएंगे। डायरेक्ट प्रोफेसर ऋषिकेश टी. कृष्णन ने बताया 2025 तक आईआईएम इंदौर को टाॅप 5 मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट्स में शामिल करने के लिए 10 सूत्रीय कार्यक्रम भी तैयार किया गया है।
21वें स्थापना दिवस पर मंगलवार को डायरेक्टर टी. कृष्णन ने कहा इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कोर्स में काफी बदलाव करना होंगे। खासतौर पर आईआईएम इंदौर के मुंबई कैम्पस के कोर्स में। नए कोर्स के साथ मुंबई और इंडस्ट्री की ज़रूरतों के मुताबिक कोर्स डिज़ाइन करना होंगे। रिसर्च वर्क को लगातार बेहतर किए जाने की भी ज़रूरत हैै। इंटरनेशनल फैकल्टीज़ को रिक्रूट जाएगा। ऐसे प्रोफेसर्स को भी नियुक्त किया जाएगा जो मैनेजमेंट रिसर्च में माहिर हों ताकि रिसर्च एरिया में प्रगति की जा सके। इसके अलावा फाॅरेन इंस्टिट्यूट्स के साथ भी कोलेबरेशन बढ़ाए जाएंगे। संस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बदलाव किए जाएंगे।
पिछड़े गांवों को एडॉप्ट करें बड़े शैक्षणिक संस्थान
बैन केपिटल के एमडी और कार्यक्रम के चीफ गेस्ट अमित चंद्रा ने “लोकोपकार स्वयं से शुरू होता है.alt39 विषय पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि किसी संस्थान को आर्थिक सहायता दे देना लोकोपकार नहीं है। हमारा देश बहुत बड़ा है और मेट्रोज़ से लेकर गांवों तक आम आदमी को कई मूलभूत सुविधाएं ही नहीं मिल रही हैं। सरकार अकेली इन्हें दूर नहीं कर सकती। ये हमारी भी ज़िम्मेदारी है। समस्याओं दूर करना भी मैनेजमेंट है। इसलिए आईआईएम जैसे संस्थानों को प्रशाासन के साथ मिलकर किसी राज्य के ऐसे जिले को गोद लें जो स्वास्थ्य या शिक्षा सेवाओं में एकदम पिछड़ा हुआ हो। इस तरह स्टूडेंट्स इससे डिज़ास्टर मैनेजमेंट सीखेंगे और देश को सोशल आंत्रप्रेन्योर्स मिलेंगे।

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