सरकार ने मुझे नजरबंद करके रखा, फोन तक छीन लिया : मेधा पाटकर

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इंदौर. सरदार सरोवर बांध के मुद्दे पर आंदोलन कर रहीं समाजसेवी मेधा पाटकर को पुलिस द्वारा आंदोलन स्थल से हटाकर बॉम्बे अस्पताल में भर्ती करवाया गया और आज दोपहर में उनकी स्वास्थ्य जांच के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। डिस्चार्ज होने के तुरंत बाद मेधा अपने सहयोगियों से मिलने पहुंची और सरकार पर गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है जो सफल नहीं होगी। मुझे झूठ बोलकर बलपूर्वक आंदोलन स्थल से उठा लिया गया और फिर दो दिन तक मुझे नंजरबंद करके रखा गया। दो दिन तक मेरे परिचितों को मुझसे मिलने नहीं दिया गया। यहां तक कि मेरा फोन भी छीन लिया। बांध बनाने से पहले ही लोगों का पुनर्वास करना चाहिए था। सरकार को किसानों और गरीबों की कोई फिक्र नहीं है।

शिवराज में वेदना ही नहीं
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ट्वीट पर मेधा ने कहा कि जिस इंसान में वेदना ही नहीं है वह संवेदनशील कैसे हो सकता है। गौरतलब है कि सीएम ने मेधा और आंदोलनकारियों के लिए कई ट्वीट किए थे और कहा था कि वे उन सभी का दर्द समझते हैं।

क्या हुआ था चिखल्दा में
चिखल्दा में 12 दिन तक अनशन कर रही मेधा पाटकर को भारी पुलिस बल की उपस्थिति में सोमवार रात करीब 9.40 बजे बॉम्बे हॉस्पिटल लाया गया। उनके आने के पहले ही एसपी अवधेश गोस्वामी, एएसपी मनोज राय व सीएसपी जयंत राठौर ने हॉस्पिटल पहुंचकर पूरी तैयारियां कर ली थी। गेट पर बेरिकेडिंग की गई ताकि कोई प्रवेश न कर सके। एम्बुलेंस से हॉस्पिटल लाते ही मेधा पाटकर को आईसीसीयू में दाखिल कराया। पाटकर के आने पर संभागायुक्त संजय दुबे और एडीजी अजय शर्मा भी पहुंच गए थे।

मेधा पाटकर के साथ उनकी केयरटेकर के रूप में निर्मला जामोद व नर्स संगीता भी चिखल्दा से बॉम्बे हॉस्पिटल आए। निर्मला का कहना था, मेधा पाटकर को चिखल्दा में पुलिस ने उठाया तो वहां जमा लोगों ने जमकर विरोध किया। भीड़ उग्र भी हो गई थी, पुलिस ने इस दौरान लोगों पर लाठीचार्ज भी किया और जबरन यहां ले आए। बॉम्बे हॉस्पिटल पहुंचे समाजसेवी चिन्मय मिश्र को भी पुलिस ने मेधा पाटकर से मिलने नहीं दिया।

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