ये क्या…शिवराज की धमकियों से अफसरों को नहीं लगता डर

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भोपाल| मप्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निशाने पर भले ही दागी अफसर हों, लेकिन हकीकत ये है कि उनकी चेतावनी का अफसरों पर कोई असर नहीं हो रहा है। जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। ऑडियो टेप के जरिए कई अधिकारियों की कारगुजारियां सामने आईं पर किसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की गई। जबलपुर में पदस्थ रहे आईएफएस अधिकारी व मुख्य वन संरक्षक अजीत श्रीवास्तव एक कार्रवाई को रफा-दफा करने के एवज में 55 लाख रुपए की मांग करते सुनाई दिए थे। दतिया में कलेक्टर रहे प्रकाश जांगरे व कार्यपालन यंत्री आरके सिंघारे के बीच ऑडियो वायरल हुआ। अजाक आयुक्त रहे जेएन मालपानी विभाग के बड़वानी में पदस्थ सहायक आयुक्त श्रोती से रिश्वत की मांग करते सुनाई दिए थे, तब उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इसके अलावा भी कई अफसर ऐसे हैं, जिनके खिलाफ जांच चल रही है पर नतीजा नहीं आया।
पांच बार धमकी दे चुके हैं शिवराज
– 17 दिसंबर 2016 आईएएस सर्विस मीट में कहा था कि जनता के विरूद्ध काम करने वालों के साथ पूरी कठोरता के साथ पेश आएंगे। किसी प्रकार की दया नहीं होगी। भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टॉलरेंस अपनाएं।
– 20 अप्रैल 2017 सिविल सर्विस डे पर अफसरों को नसीहत दी थी कि अफसर जनता को कूड़ा समझते हैं। जनता के लिए कुछ नहीं किया तो आपका जीवन बेकार है। लापरवाही हुई तो सख्त कदम उठाया जाएगा।
– 22 जुलाई 2017 भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में बोले थे कि यदि जिले में अविवादित नामांतरण और राजस्व प्रकरण लंबित मिले तो उल्टा टांग दूंगा। कलेक्टरी करने लायक नहीं छोड़ूंगा।
– 6 सितंबर 2017 रातापानी गेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री सचिवालय के अकिारियों से बातचीत करते हुए कहा था कि जो अधिकारी काम के प्रति संजीदा नहीं हैं, वे परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।
– 7 सितंबर 2017 स्वच्छ भारत की कार्यशाला में कहा कि मेरे शब्द भले ही किसी को अच्छे न लगे, लेकिन गड़बड़ी करने वालों को टांग दो। भ्रष्टाचार किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।

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