कलाई में जेंट्स घड़ी, नीली जींस ब्रॉन्डेड, काला चश्मा…यह था 90 वर्षीय कॉमरेड पेरिन दाजी का लिबास

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इंदौर। कॉटन का कुर्ता, नीली जींस और ब्रॉन्डेड काला चश्मा…। 90 साल की उम्र में इस लिबास के साथ पेरिन दाजी कलाई में जेट्स घड़ी बांधना कभी नहीं भूलती थीं, जो जांबाज नेता और उनके पति होमी दाजी की थी और उन्होंने अंतिम वक्त में उन्हें दी थी। होमी के बगैर पूरे 10 साल पेरिन ने गुजारे। जब भी मजदूरों, ठेला चालक, रिक्शे वालों के आंदोलन के बारे में पता चलता था, होमी की तरह ही उनके बीच लाल सलाम का नारा बुलंद करने पहुंच जाती थीं।

स्वदेशी मिल के ब्रिज के नामकरण की लड़ाई उन्होंने ऐसे लड़ी कि पांच साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का इंदौर आना टल गया था और बगैर लोकार्पण के ही ब्रिज जनता के लिए अफसरों को खोलना पड़ा। ‘अपने लिए जीए तो क्या जीए, ऐ दिल तू जी जमाने के लिए” गीत उन्हें पसंद था और इसी गीत की तरह जिंदगी को उन्होंने जीया। मौत के बाद उनकी आंखें, किडनी व अन्य अंग दूसरों के काम आए, वे ऐसा ही चाहती थीं, लेकिन बीमारी के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाया।

श्रमिक क्षेत्र के शमशान में अंत्येष्टि की उनकी इच्छा जरूर पूरी हुई। उन्होंने परिजन को कह रखा था कि मैं मरूं तो मुझे उसी श्मशान में ले जाना जहां मजदूरों को ले जाते हैं। मालवा मिल स्थित कम्युनिस्ट कार्यालय शहीद भवन से उनकी शवयात्रा बुधवार शाम को निकली। इसमें ज्यादा भीड़ नहीं थी, नेता भी गिने-चुने ही आए थे, लेकिन सभी ने दिल से उन्हें याद किया।

वरिष्ठ अभिभाषक आनंद मोहन माथुर ने कहा कि दाजी परिवार ने राजनीति गरीबों की सेवा के लिए की। पैसा कभी नहीं कमाया, हमेशा मोहब्बत लुटाई। हाउसिंग बोर्ड की जेल रोड स्थित बिल्डिंग की पहली मंजिल पर होमी और पेरिन रहते थे, होमी को चढ़ने में मुश्किल होती थी, तो मैंने तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से कहा। सिंह ने उनके लिए एक बंगला अलॉट करवा दिया, लेकिन होमी और पेरिन वहां नहीं गए।

गरीबों के हक के लिए लड़ना सिखाया

कवि सरोज कुमार ने कहा कि पेरिन होमी के लिए ही बनी थीं। दोनों की सोच एक जैसी थी, जैसे एक सांचे में ढले हों। होमी जेल में बंद रहते थे तो पेरिन उन्हें टिफिन देने जाती थीं। कांग्रेस के पूर्व विधायक अश्विन जोशी ने कहा कि गरीबों, मजदूरों के हक के लिए हमें लड़ना पेरिन ने सिखाया है। विनय बाकलीवाल, अनिल त्रिवेदी, आलोक खरे, कल्याण जैन, विनीत तिवारी, पिंटू जोशी ने भी पेरिन को याद किया।

जूते बनाने वाले की पत्नी से कराया था अपनी किताब का विमोचन

पेरिन दाजी को अनेक राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने श्रद्धांजलि दी। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए उनके कार्य हमारे लिए प्रेरणादाई हैं। मेयर मालिनी गौड़ ने भी शोक व्यक्त किया। पेरिन द्वारा लिखी गई किताब का संपादन करने वाले विनीत तिवारी बताते हैं कि उनकी किताब ‘यादों की रोशनी में” छपकर आई तो विमोचन करने के लिए कई नामों पर चर्चा हुई।

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