इंदौर में बिना जांच के नहीं बिक सकेगा सांची का दूध

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इंदौर। सांची दूध में केमिकल मिलावट मामले में प्रमोद द्विवेदी द्वारा एड्वोंकेट मनीष यादव के माध्यम से जनहित याचिका को हाईकोर्ट स्वीकार कर ली है। 9 अक्टूबर को अंतिम बहस सुनकर फैसला सुरक्षित रखा था। शुक्रवार को उक्त मामले में हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय, सचिव, कमिश्नर खाद्य आपूर्ति को दूध के वितरण की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए हर माह दुग्ध संघ में बाहर से आने वाले दूध की शुद्धता जांच सख्ती से करने के निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि दूध के सेंपल नियमित रूप से जांचे जाए। साथ ही पैक दूध के भी हर माह आवश्यक रूप से सेंपल लिए जाए शुद्धता जांची जाए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनीष यादव के तर्क थे कि सांची दूध का सेवन नवजात बच्चे समेत सभी करते है, जन-जन के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। दूध में मिलावट होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। सांची दुग्ध संघ अपना जवाब पेश कर चुका करते हुए सभी आरोपों को नकारा था और याचिका को केवल पेपर की खबरों पर आधारित होकर आधारहीन माना था। सांची के इन तर्कों को न मानते हुए मीडिया खबरों और याचिकाकर्ता के तर्कों से सहमत होते हुए उपरोक्त याचिका स्वीकार की। प्रशासनिक न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति वीरेंदर सिंह की डबल बेंच ने उपरोक्त आदेश पारित किए और सरकार को सख्ती से पालन करने को आदेशित किया।

सांची प्लांट में दूध की मिलावट होने को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई पूरी हो गई। हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। अंतिम तर्क में याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि जो नवजात, मां का दूध नहीं पी पाते, उनके लिए डॉक्टर सांची का दूध लेने की सलाह देते हैं। ऐसे में अगर सांची का दूध मिलावटी होगा तो यह बच्चों के लिए कितना खतरनाक होगा।

हाई कोर्ट इस मामले में कोई ठोस कदम उठाए। वहीं सांची की ओर दलील दी गई है कि प्लांट में दूध में मिलावट होना संभव ही नहीं है। जो टैंकर मिलावट होने में लिप्त पाया गया था, वह प्लांट के बाहर ही पकड़ा गया था। जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा, जस्टिस वीरेंदर सिंह की डिविजन बेंच के समक्ष इस मामले की अंतिम बहस हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव ने पैरवी की। कोर्ट को बताया कि सांची के द्वारा मिलावट से इनकार किया जा रहा है, लेकिन पुलिस ने जिन लोगों को मिलावट करते पकड़ा था, उनके खिलाफ ट्रायल कोर्ट में चालान पेश किया जा चुका है। सांची प्रबंधन ने ही एफआईआर लिखवाई थी। मिलावट का भंडाफोड़ हुआ तो इस बात का खुलासा हुआ। अन्यथा कई सालों से इस तरह मिलावटी दूध अंदर जा रहा होगा और घर-घर पहुंच रहा होगा। भोपाल स्थित लैब ने भी टैंकर से लिए सैंपल में मिलावट होना प्रमाणित किया था। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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